हमारे बारे में
AKSG क्यों आवश्यक है
यह कार्यक्रम मानव-मानव और मानव-प्रकृति संबंधों में सामंजस्य स्थापित करके एक न्यायपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

हमारा दृष्टिकोण
एक दृष्टिकोण – एक पृथ्वी,एक राष्ट्र, एक परिवार
हमारा मिशन
यह कार्यक्रम पांच एकीकृत आयामों के इर्द-गिर्द तैयार किया गया है जो समग्रमानव विकास को बढ़ावा देते हैं और एक न्यायपूर्ण, समृद्ध समाज का निर्माण करते हैं।
हमारा दर्शन
श्री ए. नागराज के मध्यस्थ दर्शन पर आधारित
मानव मूल्य
अस्तित्व सह-अस्तित्व है
परिवार मूल इकाई
मानव-प्रकृति सामंजस्य
एक धरती एक राष्ट्र एक परिवार
वर्तमान स्थिति
मानव–मानव संबंधों की चुनौतियां
- भय, अविश्वास, स्वार्थ, व्यक्तिवाद और सामुदायिक विभाजन।
- परिवारों में संवाद, सामंजस्य और मूल्य-आधारित शिक्षा का अभाव।
- वर्ग, जाति और धर्म के आधार पर सामाजिक विभाजन।
- राष्ट्रों के बीच संघर्ष, हिंसा, युद्ध और अशांति।
मानव–प्रकृति संबंधों की चुनौतियां
- वनों की कटाई और जल संसाधनों का प्रदूषण।
- प्राकृतिक संसाधनों का अस्थायी दोहन और जैव-विविधता की हानि।
- औद्योगिक प्रदूषण और रसायन-आधारित कृषि पर अत्यधिक निर्भरता।
- उपभोग-प्रधान और शोषणकारी जीवनशैली, जो धरती पर दबाव बढ़ाती है और पारिस्थितिक स्वास्थ्य को खतरे में डालती है।
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AKSG समाधान
मानव–मानव संबंधों में समाधान
- अभय, विश्वास, स्नेह और उभय-तृप्ति।
- परिवार को मानव-केंद्रित समाज व्यवस्था की मूल इकाई मानना, जहां मूल्य-आधारित शिक्षा परिवारों में सुख और जागरूकता को बढ़ाती है।
- एक मानव जाति, एक मानव समुदाय और एक सार्वभौम मानव धर्म।
- एक धरती, एक राष्ट्र, जो राष्ट्रों के बीच एकता, शांति और सह-अस्तित्व को मजबूत करता है।
मानव–प्रकृति संबंधों में समाधान
- मिट्टी, वन और खनिज संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन और संतुलित प्रबंधन।
- जैव-विविधता को सुरक्षित रखते हुए धरती के सतही संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग।
- प्राकृतिक सिद्धांतों और पारिस्थितिक संतुलन पर आधारित कृषि और उद्योग।
- अधिक उत्पादन और सजग, संयमित उपभोग पर आधारित जीवनशैली।
ग्राम-शहर पूरकता
सह-अस्तित्व से ग्रामीण-शहरी सामंजस्य को मजबूत करना
आनंदी कुटुंब समृद्ध ग्राम कार्यक्रम केवल ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं है। यह मानता है कि गांव और शहर एक-दूसरे के पूरक हैं।
परिवार-केंद्रित स्वशासन व्यवस्था में ग्राम का योगदान
- उत्पादक श्रम, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण-संवर्धन और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा।
- सामुदायिक जीवन, परस्पर सहयोग और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व।
- परंपरा, स्थिरता और जिम्मेदार जीवन पर आधारित संतुलित जीवनशैली।
- प्राकृतिक सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय और शासन।
अस्तित्व सह-अस्तित्व है
परिवार-केंद्रित स्वशासन व्यवस्था में शहर का योगदान
- उच्च शिक्षा, तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और नवाचार में उत्कृष्टता।
- तकनीकी कौशल और मूल्य-वर्धित सेवाओं का विकास और प्रसार।
- प्रबंधकीय क्षमता, उद्यमशीलता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना।
