AKSG प्रेरक बनें
AKSG प्रेरक वह व्यक्ति है, जो ग्राम समुदायों के साथ मिलकर सहभागिता को प्रोत्साहित करता है, स्थानीय गतिविधियों का समन्वय करता है और आनंदी कुटुंब समृद्ध ग्राम कार्यक्रम के व्यावहारिक विकास में सहयोग देता है।
प्रेरक गाँव, कस्बे या शहर में रहने वाला व्यक्ति भी हो सकता है। इस भूमिका में अपनी क्षमताओं, उपलब्ध समय और जिम्मेदारियों के अनुसार सहभागी परिवारों तथा स्थानीय संस्थाओं के साथ निरंतर जुड़कर कार्य करना शामिल है।
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जिम्मेदारी पर आधारित भूमिका
प्रेरक की भूमिका व्यक्तिगत प्रतिबद्धता और ग्राम विकास में सहभागिता की इच्छा पर आधारित है।
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यह कोई सामान्य नौकरी, शैक्षणिक पाठ्यक्रम या छात्रवृत्ति नहीं है। इसमें लोगों के साथ कार्य करना, स्थानीय परिस्थितियों को समझना और समुदाय द्वारा तय की गई गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहयोग देना शामिल है।
02
प्रेरक से अपेक्षा है कि वह निरंतरता के साथ योगदान दे, सहभागी परिवारों के साथ सार्थक संबंध बनाए रखे और व्यापक AKSG कार्यक्रम से जुड़ा रहे।
व्यक्ति और गाँव की परिस्थितियों के अनुसार सहभागिता का स्वरूप और समय अलग-अलग हो सकता है।
प्रेरक कौन बन सकता है?
इस कार्यक्रम में व्यक्ति और विवाहित दंपति, दोनों भाग ले सकते हैं।
01. व्यक्तिगत प्रेरक
कोई व्यक्ति अपने समय, ज्ञान, कौशल और क्षमताओं के अनुसार ग्राम-स्तरीय गतिविधियों तथा सामुदायिक समन्वय में योगदान दे सकता है।
02. प्रेरक दंपति
विवाहित दंपति एक साथ इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं। वे अपनी-अपनी क्षमताओं और परिस्थितियों के अनुसार जिम्मेदारियाँ बाँटकर योगदान दे सकते हैं।
सहभागिता केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। कस्बों और शहरों में रहने वाले व्यक्ति भी इस कार्य से जुड़ सकते हैं, बशर्ते वे कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम हों।
पाँचों आयामों में कार्य
प्रेरक का कार्य AKSG के पाँचों आयामों से जुड़ा होता है, भले ही किसी व्यक्ति का विशेष अनुभव या रुचि इनमें से किसी एक क्षेत्र में हो।
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शिक्षा–संस्कार
मूल्य शिक्षा से संबंधित गतिविधियों और स्थानीय अध्ययन के अवसरों को आगे बढ़ाने में सहयोग देना।
02
स्वास्थ्य–संयम
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारीपूर्ण दैनिक आचरण को प्रोत्साहित करना।
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उत्पादन–कार्य
इच्छुक परिवारों को कृषि, कौशल विकास और उत्पादन से संबंधित उपयुक्त गतिविधियों से जोड़ना।
04
विनिमय–कोष
आपसी सहयोग, साझा संसाधनों के उपयोग और जिम्मेदारीपूर्ण विनिमय को बढ़ावा देने में सहायता करना।
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न्याय–सुरक्षा
सामुदायिक विषयों पर संवाद, विश्वास और जिम्मेदारीपूर्ण सहभागिता को प्रोत्साहित करना।
प्रेरक से अपेक्षा नहीं है कि वह प्रत्येक आयाम का तकनीकी विशेषज्ञ हो। उसकी जिम्मेदारी यह समझना है कि ग्राम जीवन में ये सभी क्षेत्र किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हैं और स्थानीय प्रतिभागियों को उपयुक्त व्यक्तियों तथा संस्थाओं से जोड़ने में सहयोग देना है।
ग्राम समुदायों के साथ कार्य
प्रेरक का कार्य परिवारों, ग्राम प्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थाओं और स्थानीय समूहों के साथ निरंतर संवाद तथा सहभागिता के माध्यम से विकसित होता है। गाँव की परिस्थितियों और कार्यक्रम की प्रगति के अनुसार प्रेरक की जिम्मेदारियों में निम्नलिखित कार्य शामिल हो सकते हैं।
01. सामुदायिक सहभागिता
परिवारों से मिलना, उनकी रुचियों को समझना और उन्हें संवाद, अध्ययन तथा सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना।
02. कार्यक्रम का समन्वय
स्थानीय प्रतिभागियों के साथ मिलकर बैठकों, परिचय शिविरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और व्यावहारिक गतिविधियों के आयोजन में सहयोग देना।
03. स्थानीय संस्थाओं के साथ कार्य
जहाँ सहभागिता की रुचि और सहमति हो, वहाँ ग्राम पंचायतों, विद्यालयों और सामुदायिक समूहों के साथ समन्वय करना।
04. गतिविधियों की निरंतर समीक्षा
सहभागी परिवारों के संपर्क में रहना, चल रही गतिविधियों की समीक्षा करना और उन क्षेत्रों की पहचान करने में सहयोग देना, जहाँ अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
05. AKSG के साथ समन्वय
अनुभव साझा करने, मार्गदर्शन प्राप्त करने और आवश्यक संसाधनों का समन्वय करने के लिए कार्यक्रम के समन्वयकों तथा सहयोगी संस्थाओं के साथ जुड़े रहना।
प्रेरक की विशिष्ट जिम्मेदारियाँ सहभागी ग्राम समुदाय और AKSG समन्वयकों के साथ चर्चा के आधार पर तय की जाती हैं।
क्या आप AKSG प्रेरक बनना चाहते हैं?
कार्यक्रम में योगदान देने के इच्छुक व्यक्ति और दंपति नीचे दिए गए फॉर्म के माध्यम से अपनी रुचि दर्ज कर सकते हैं।
फॉर्म में दी गई जानकारी से AKSG टीम को आपकी पृष्ठभूमि, रुचियों और सहभागिता के संभावित कार्यक्षेत्रों को समझने में सहायता मिलेगी।
