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धरती एकराष्ट्र एकपरिवार एक

मध्यस्थ दर्शन और उसके अंतर्गत प्रस्तावित चेतना विकास मूल्य शिक्षा पर आधारित परिवार-मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था का एक कार्यक्रम।

AKSG का उद्देश्य व्यक्तियों, परिवारों और ग्राम समुदायों को साथ लाकर समझदारी, आपसी विश्वास, जिम्मेदारीपूर्ण उत्पादन और ग्राम व्यवस्था में सहभागिता को विकसित करना है, ताकि आनंदी परिवार और समृद्ध ग्राम की स्थापना हो सके।

AKSG village community with learning, farming, and water conservation

AKSG की आवश्यकता क्यों?

किसी गाँव में जीवन की गुणवत्ता केवल भौतिक सुविधाओं और आर्थिक अवसरों पर निर्भर नहीं करती। परिवारों में संबंध, समझदारी, स्वास्थ्य, स्थानीय उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

AKSG कार्यक्रम मानव जीवन में संबंधों के दो मूल क्षेत्रों को ध्यान में रखता है।

हमारे दृष्टिकोण को समझें
मानव–मानव

मानव–मानव संबंध

  • परिवार और समाज में संबंध, सामाजिक जीवन का आधार हैं। विश्वास, न्याय, संवाद और सहयोग आवश्यक हैं, ताकि व्यक्ति और परिवार परस्पर संतुष्टि के साथ जी सकें।
मानव–प्रकृति

मानव–शेष प्रकृति संबंध

  • मनुष्य अपने पोषण, आवास और जीवन की अन्य भौतिक आवश्यकताओं के लिए प्रकृति पर निर्भर है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन और जिम्मेदारीपूर्ण उत्पादन एक संतुलित जीवन व्यवस्था के लिए आवश्यक हैं।

इन दोनों संबंधों को साथ समझना AKSG कार्यक्रम के दृष्टिकोण का आधार है।

परिवार-मूलक स्वराज्य व्यवस्था

AKSG परिवार को मानव व्यवस्था की मूल इकाई के रूप में स्वीकार करता है। मूल्य शिक्षा के माध्यम से परिवारों में वह समझदारी और जिम्मेदारी विकसित हो सकती है, जिससे वे समाज और ग्राम व्यवस्था में सार्थक भागीदारी कर सकें।

कार्यक्रम का प्रस्ताव है कि परिवार और ग्राम समुदाय सामूहिक सहभागिता तथा स्थानीय निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, उत्पादन, विनिमय और न्याय से जुड़ी जिम्मेदारियों को क्रमशः स्वयं संभालें।

यह कार्यक्रम ग्राम और शहर की परस्पर पूरक भूमिका को भी स्वीकार करता है। गाँव स्थानीय उत्पादन, प्राकृतिक संसाधनों और सामुदायिक जीवन में योगदान देते हैं, जबकि शहर उच्च शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक, वितरण और संस्थागत क्षमताओं के माध्यम से योगदान देते हैं।

यह परस्पर पूरकता परिवार-मूलक, स्वावलंबी और सहयोगपूर्ण मानवीय व्यवस्था के विकास में सहायक है।

कार्यक्रम के बारे में जानें

मानवीय व्यवस्था के पाँच आयाम

मध्यस्थ दर्शन पर आधारित AKSG की रूपरेखा में पाँच परस्पर जुड़े आयाम शामिल हैं। ये व्यक्ति, परिवार और समाज की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित करते हैं।

01

शिक्षा–संस्कार

चेतना विकास मूल्य शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से समझदारी, मानवीय मूल्यों, संबंधों की पहचान, व्यवहार कुशलता और व्यावहारिक क्षमताओं का विकास।

02

स्वास्थ्य–संयम

संतुलित जीवनशैली, उचित आहार-विहार, शरीर के स्वास्थ्य, निवारक स्वास्थ्य पद्धतियों तथा अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी को बढ़ावा देना।

03

उत्पादन–कार्य

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन करते हुए व्यावहारिक कौशल, श्रम में सहभागिता, प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादन की क्षमताओं को विकसित करना।

04

विनिमय–कोष

न्यायसंगत विनिमय, संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण प्रबंधन, सामूहिक कोष तथा समुदाय की समृद्धि के लिए अतिरिक्त उत्पादन के सदुपयोग की समझ विकसित करना।

05

न्याय–सुरक्षा

संबंधों की पहचान, मानवीय मूल्यों का निर्वाह, सही मूल्यांकन और उभय तृप्ति के माध्यम से परिवार और समाज में विश्वास तथा न्याय की स्थापना करना।

पाँचों आयामों को विस्तार से समझें

गाँव में कार्यक्रम का क्रियान्वयन

AKSG कार्यक्रम सहभागिता पर आधारित है, जिसमें परिवार, ग्राम पंचायत, शिक्षक, स्थानीय संस्थाएँ और स्वयंसेवक मिलकर कार्य करते हैं।

प्रारंभिक पाँच वर्षों में मूल्य शिक्षा की स्थापना, परिवारों की सहभागिता बढ़ाने और पाँचों आयामों में गतिविधियाँ विकसित करने पर ध्यान दिया जाता है।

क्रियान्वयन की प्रमुख प्रक्रियाएँ

ग्राम से समृद्ध ग्राम तक
चरण 1ग्राम का अध्ययनगाँव की वर्तमान परिस्थितियों, संसाधनों, आवश्यकताओं और पहले से चल रही सामुदायिक पहलों का अध्ययन करना।
↓
चरण 2जन संवादपरिवारों के बीच संवाद, जीवन विद्या परिचय शिविर और सामूहिक चर्चाओं का आयोजन करना।
↓
चरण 3स्थानीय प्रतिभागियों को तैयार करनानिरंतर सहभागिता के लिए प्रेरकों, इच्छुक परिवारों, शिक्षकों और समन्वयकों की पहचान करना।
↓
चरण 4व्यावहारिक गतिविधियों की शुरुआतस्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, उत्पादन, विनिमय और न्याय से संबंधित गतिविधियाँ प्रारंभ करना।
↓
चरण 5प्रगति की समीक्षानियमित मूल्यांकन, सामूहिक समीक्षा और जन सहभागिता के आधार पर आवश्यक सुधार करना।

कार्यक्रम का दीर्घकालिक उद्देश्य ऐसे ग्राम समुदायों का विकास करना है, जो बढ़ती समझदारी, सहयोग और स्वावलंबन के साथ अपनी सामूहिक जिम्मेदारियों को स्वयं संभाल सकें।

ग्राम विकास की कार्यप्रणाली समझें

साथ मिलकर कार्य करती संस्थाएँ

AKSG को मध्यस्थ दर्शन के अध्ययन, मूल्य शिक्षा, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण विकास, अनुसंधान और सामुदायिक गतिविधियों में कार्यरत संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है।

इन संस्थाओं का अनुभव, ज्ञान और संसाधन ग्राम समुदायों में कार्यक्रम के विकास, क्रियान्वयन और अध्ययन में योगदान देते हैं।

सहयोगी संस्थाओं के बारे में जानें
Divya Path Sansthan, Amarkantak
Divya Path Sansthan, Amarkantak
Abhyuday Sansthan, Acchoti, Chhattisgarh
A. Nagraj Manaviy Shikshan Shodh Kendra, Parda, Maharashtra
SHAPE Foundation
SHAPE Foundation
Yashwant Krishi, Gram va Panlot Vikas Sansthan, Hivre Bazar, Maharashtra

गाँवों के अनुभवों से सीख

भारत के विभिन्न गाँवों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जन सहभागिता, खेती और सामुदायिक विकास के अलग-अलग प्रयास हुए हैं।

इन ग्राम अध्ययनों में ऐसे अनुभव और सीख प्रस्तुत किए गए हैं, जो AKSG कार्यक्रम के लिए उपयोगी हैं।

सूखा प्रभावित गाँव से सहभागी विकास का आदर्श मॉडल

हिवरे बाजार, महाराष्ट्र

जलागम क्षेत्र विकास, जल संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय स्वराज्य व्यवस्था के लिए जाना जाने वाला गाँव।

ग्राम अध्ययन पढ़ें
मूल्य शिक्षा से समुदाय-नेतृत्व वाले ग्राम विकास तक

बोदरा, छत्तीसगढ़

जीवन विद्या संवाद, परिवारों की सहभागिता और पाँचों आयामों से संबंधित ग्राम-स्तरीय गतिविधियों के माध्यम से सामुदायिक प्रयास।

ग्राम अध्ययन पढ़ें
प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनरुद्धार

आवरी, छत्तीसगढ़

प्राकृतिक खेती, मिट्टी के स्वास्थ्य, व्यावहारिक कृषि और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से जुड़े ग्राम-स्तरीय प्रयोग।

ग्राम अध्ययन पढ़ें
सीख को समुदाय-नेतृत्व वाले जल संरक्षण में बदलना

गुजरा, छत्तीसगढ़

ग्राम विकास के अनुभवों से सीख लेकर जन सहभागिता के माध्यम से जल संरक्षण और स्थानीय जल प्रबंधन के प्रयास।

ग्राम अध्ययन पढ़ें
सभी ग्राम अध्ययन देखें

AKSG से जुड़ें

यह कार्यक्रम उन व्यक्तियों, परिवारों, शिक्षकों, संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों का स्वागत करता है, जो मूल्य शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ग्राम विकास में योगदान देना चाहते हैं।

अपनी रुचि और क्षमताओं के अनुसार प्रतिभागी अध्ययन, स्वयंसेवा, ग्राम समन्वय, कृषि, तकनीकी ज्ञान, दस्तावेज़ीकरण और संस्थागत सहयोग के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

संस्थागत सहयोग के लिए संपर्क करें