बोड़रा
जीवन विद्या का अध्ययन और विभिन्न गाँवों में सामुदायिक सहभागिता
मगरलोड क्षेत्र में स्थित बोड़रा और इसके आसपास के गाँवों में जीवन विद्या–सह-अस्तित्व के अध्ययन और सामुदायिक संवाद की गतिविधियाँ निरंतर चल रही हैं।
इन गाँवों के परिवार, शिक्षक, किसान और युवा शिक्षा से जुड़ी गोष्ठियों तथा ग्राम जीवन से संबंधित व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लेते रहे हैं। इस अनुभव की विशेषता कई पड़ोसी गाँवों की सहभागिता और विभिन्न पीढ़ियों में अध्ययन की निरंतरता है।

सहभागी गाँवों का समूह
मगरलोड विकासखंड, धमतरी, छत्तीसगढ़
बोड़रा, कपालफोड़ी, बड़ी करेली, मंदरौद
जीवन विद्या–सह-अस्तित्व का अध्ययन एवं संवाद
परिवार, शिक्षक, किसान और युवा
शिक्षा, पारिवारिक बैठकें, कृषि, साझा संसाधन और स्वास्थ्य



विभिन्न पीढ़ियों से जुड़ा अध्ययन
इस ग्राम समूह में जीवन विद्या से जुड़ाव की शुरुआत कपालफोड़ी के कुछ इच्छुक शिक्षकों और परिवारों के माध्यम से हुई।
श्री ए. नागराज जी भी कपालफोड़ी आए थे। इसके बाद जीवन विद्या परिचय शिविरों और नियमित अध्ययन गोष्ठियों के माध्यम से सहभागिता आगे बढ़ी।
धीरे-धीरे अधिक परिवार जुड़ने लगे और ये गतिविधियाँ बोड़रा, बड़ी करेली, मंदरौद तथा आसपास के अन्य गाँवों तक पहुँचीं।
समय के साथ सहभागी परिवारों की नई पीढ़ी के युवाओं ने भी अपनी अध्ययन गोष्ठियों में भाग लेना और स्थानीय गतिविधियों में योगदान देना शुरू किया।
पीढ़ियों के बीच अध्ययन की इस निरंतरता से शैक्षणिक और सामुदायिक गतिविधियों में वयस्कों के साथ युवाओं की भागीदारी भी बनी हुई है।
मूल्य शिक्षा में शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता
इस ग्राम समूह में जीवन विद्या के अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ाने में स्थानीय विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बोड़रा के सरस्वती शिशु मंदिर में शंकर साहू और विष्णु साहू सहित अन्य शिक्षकों ने जीवन विद्या परिचय शिविरों में भाग लिया है। इन शिक्षकों ने बच्चों की शिक्षा में मूल्य शिक्षा को शामिल करने की संभावनाओं पर कार्य किया है।
शैक्षणिक सहभागिता
- बोड़रासरस्वती शिशु मंदिरविद्यार्थी: लगभग 250
- मंदरौदकबीर पंथ शिक्षण संस्थाविद्यार्थी: लगभग 250
- बड़ी करेलीसंविधान अकादमीविद्यार्थी: 250–300
औपचारिक शिक्षा के साथ बच्चों में संबंधों, व्यवहार, जिम्मेदारियों और पारिवारिक जीवन में सहभागिता की समझ विकसित करने के लिए भी संवाद किए जाते हैं।
सामुदायिक गतिविधियाँ
परिवारों की नियमित बैठकें
बोड़रा में परिवार नियमित रूप से शाम के समय, सामान्यतः 7:00 से 8:00 बजे के बीच, एकत्र होते हैं।
इन बैठकों में व्यक्तिगत अनुभवों, पारिवारिक संबंधों और समुदाय से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है।
इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिभागी परिचय शिविरों के बाद भी अपने अध्ययन और संवाद को निरंतर बनाए रखते हैं तथा एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं।
प्राकृतिक खेती और वृक्षारोपण
क्षेत्र के कुछ किसानों ने प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।
समुदाय ने सामूहिक प्रयासों से वृक्षारोपण की गतिविधियाँ भी की हैं और एक छोटा वन क्षेत्र विकसित किया है।
ये पहल ऐसी कृषि पद्धतियों के प्रति रुचि दर्शाती हैं, जिनमें मिट्टी, पानी और प्राकृतिक संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है।
सामुदायिक संसाधनों का साझा उपयोग
एक व्यावहारिक पहल के अंतर्गत गाँव में विवाह और अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए बर्तन, थालियाँ, कटोरियाँ और कुर्सियाँ सामूहिक रूप से खरीदी गई हैं।
सहभागी परिवार आवश्यकता पड़ने पर इन सामग्रियों का निःशुल्क उपयोग कर सकते हैं।
इस व्यवस्था से प्रत्येक परिवार को कभी-कभार उपयोग में आने वाली वस्तुएँ अलग से खरीदने की आवश्यकता कम होती है। साथ ही, सामुदायिक आयोजनों के लिए साझा संसाधन उपलब्ध रहते हैं।
पारंपरिक स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान
परिवार पारंपरिक घरेलू उपचारों, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारों की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं।
इन चर्चाओं में दैनिक स्वास्थ्य, आहार, कृषि पद्धतियों और पारिवारिक दिनचर्या के बीच संबंध को भी समझने का प्रयास किया जाता है।
स्वदेस फाउंडेशन का भ्रमण
स्वदेस फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने इस ग्राम समूह का भ्रमण किया और स्थानीय निवासियों से संवाद किया।
इस भ्रमण के दौरान परिवारों की सहभागिता, आपसी सहयोग और सामुदायिक संसाधनों के साझा उपयोग की व्यवस्थाओं को देखने का अवसर मिला।
इस संवाद में शिक्षा और व्यावहारिक गतिविधियों में ग्राम समुदाय की निरंतर सहभागिता भी सामने आई।
आगे के कार्यक्षेत्र
बोड़रा और आसपास के गाँवों में चल रहे कार्यों को आगे विकसित करने की कई संभावनाएँ हैं।
परिवारों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों की निरंतर सहभागिता इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने का आधार प्रदान करती है।
विभिन्न गाँवों में निरंतर सहभागिता
बोड़रा और आसपास के गाँवों का अनुभव दर्शाता है कि नियमित अध्ययन, साझा गतिविधियाँ और परिवारों के बीच संबंध सामुदायिक सहभागिता को निरंतर बनाए रखने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं।
इस अनुभव में नई पीढ़ी की सहभागिता और कई गाँवों के बीच सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
